Air Pollution Health Alert: हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ ही देश की राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता तेजी से गिरने लगती है। आसमान में धुंध और स्मॉग की मोटी परत साफ नजर आने लगती है। हवा में मौजूद सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर की वजह से लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। इसका सीधा असर अस्पतालों में दिख रहा है, जहां सांस से जुड़ी समस्याओं की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासतौर पर सर्दियों में प्रदूषण, ठंडी हवा और वायरल संक्रमण मिलकर छाती के संक्रमण और निमोनिया के मामलों को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
डॉक्टर क्या कहते हैं?
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, गुरुग्राम में ब्रोंकोलॉजी और रेस्पिरेटरी मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नेविन किशोर के अनुसार, “हम सांस लेने की समस्याओं में मामूली लेकिन लगातार वृद्धि देख रहे हैं। ओपीडी कंसल्टेशन में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।” उन्होंने बताया कि इसकी वजह आंशिक रूप से बढ़ता वायु प्रदूषण है और आंशिक रूप से ठंड और सर्दियों की शुरुआत। इस मौसम में सांस की तकलीफ, खांसी और सीने में जकड़न की शिकायतें ज्यादा देखने को मिल रही हैं।
किन लोगों को होती है सबसे ज्यादा परेशानी?
हर साल सर्दी की शुरुआत में वायरल संक्रमण बढ़ जाते हैं, जो गले और छाती को प्रभावित करते हैं। छाती में संक्रमण और निमोनिया का खतरा सबसे ज्यादा बुजुर्गों और बच्चों को होता है। हृदय रोग, मधुमेह, किडनी की बीमारी या अन्य पुरानी बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों पर प्रदूषण का असर और भी गंभीर हो जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, इस समय ठंडी हवा, वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण के कारण छाती के संक्रमण और निमोनिया के मामलों में तेजी देखी जा रही है।
5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ज्यादा जानलेवा
डैफोडिल्स बाय आर्टेमिस हॉस्पिटल, गुरुग्राम के चीफ पीडियाट्रिशियन डॉ. राजीव छाबड़ा बताते हैं कि भारत में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में मौत के सबसे आम कारणों में निमोनिया शामिल है। उन्होंने बताया कि धूम्रपान, वायु प्रदूषण, खराब स्वच्छता, अपर्याप्त पोषण और टीकाकरण व दवाओं तक सीमित पहुंच जैसी वजहें बच्चों में फेफड़ों के संक्रमण को और खतरनाक बना देती हैं। इसी कारण माता-पिता को इस मौसम में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।
श्वसन संक्रमण और निमोनिया से बचाव के उपाय
- 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को फ्लू का टीका जरूर लगवाना चाहिए। कमजोर और जोखिम वाले लोगों के लिए निमोनिया का टीका भी जरूरी है।
- जिन लोगों को पहले से फेफड़ों की बीमारी है, वे डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं और इनहेलर नियमित रूप से लें।
- एक्यूआई ज्यादा होने पर बाहर निकलने से बचें। बच्चों को बाहर खेलने न दें और जितना हो सके घर के अंदर रहें। बाहर जाना जरूरी हो तो मुंह को गीले कपड़े से ढकें।
- खुद को गर्म रखें और गर्म तरल पदार्थ जैसे सूप या काढ़ा लें, खासकर बुजुर्गों को।
- मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज अपनी दवाएं नियमित लें और शुगर व बीपी को नियंत्रण में रखें, क्योंकि अनियंत्रित स्थिति में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है।
बच्चों को बीमारी से ऐसे रखें सुरक्षित
मुंबई के सिम्बायोसिस अस्पताल की चाइल्ड स्पेशलिस्ट और नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. वैदेही दांडे के अनुसार, “श्वसन संक्रमण वाले बच्चों को घर में अलग रखना जरूरी है, ताकि संक्रमण अन्य बच्चों में न फैले।” उन्होंने सलाह दी कि खराब हवादार और भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें, बार-बार गले लगाना या किस करने से परहेज करें। एयर कंडीशनर की नियमित सर्विसिंग और घर व स्कूलों में सही वेंटिलेशन भी बेहद जरूरी है। जब हवा की गुणवत्ता बेहतर हो, तब बच्चों को आउटडोर खेल और व्यायाम के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
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