Diabetes Alert: कारण, असर और इससे होने वाले बड़े खतरे

Diabetes Alert: डायबिटीज या मधुमेह का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में सबसे पहले खून में शुगर लेवल बढ़ने की बात आती है। आमतौर पर लोग यही मानते हैं कि डायबिटीज मतलब सिर्फ मीठा कम खाना और शुगर कंट्रोल करना। लेकिन अगर इसे वैज्ञानिक नजरिए से समझें, तो डायबिटीज केवल ब्लड शुगर बढ़ने तक सीमित बीमारी नहीं है। यह धीरे-धीरे शरीर के कई अहम अंगों जैसे किडनी, आंखों, नसों, दिल और रक्त वाहिकाओं को भी प्रभावित करती है। इसलिए डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटीज का इलाज सिर्फ शुगर कम करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके साथ-साथ आंखों, किडनी, नसों, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को भी हमेशा कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है।

डॉक्टर क्या कहते हैं डायबिटीज के कारणों पर

डॉक्टरों के मुताबिक, किसी भी बीमारी का सही इलाज तभी संभव है जब उसके कारणों को समझा जाए। डायबिटीज भी किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई कारणों के मिले जुले प्रभाव से होती है। इनमें सबसे प्रमुख कारण हैं-आनुवंशिकता, अत्यधिक मोटापा, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियंत्रित खान-पान। इन कारणों की वजह से शरीर में जरूरत के अनुसार इंसुलिन नहीं बन पाता। इंसुलिन एक बेहद जरूरी हार्मोन है, जो पेट में मौजूद अग्नाशय (पैंक्रियाज) में बनता है। इसका काम भोजन से मिलने वाली शर्करा को ऊर्जा यानी कैलोरी में बदलना होता है। जब इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है या वह सही तरीके से काम नहीं करता, तो शर्करा खून में ही जमा होने लगती है। इसी स्थिति को हम ब्लड शुगर या डायबिटीज कहते हैं।

डायबिटीज के मुख्य प्रकार

टाइप-1 डायबिटीज आमतौर पर 20 साल से कम उम्र के लोगों में पाई जाती है। इस स्थिति में शरीर पूरी तरह इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। ऐसे मरीजों को जीवनभर बाहर से इंसुलिन लेना पड़ता है। हालांकि, टाइप-1 के मरीज कुल डायबिटीज मरीजों का लगभग 5 प्रतिशत ही होते हैं।

टाइप-2 डायबिटीज सबसे आम है और करीब 85 प्रतिशत से ज्यादा मरीज इसी श्रेणी में आते हैं। यह बीमारी अक्सर 30 से 40 साल की उम्र के बीच दिखाई देती है। शुरुआती दौर में शरीर इंसुलिन बनाता तो है, लेकिन वह सही तरीके से काम नहीं कर पाता।

डायबिटीज में क्या खाना सही है

अक्सर लोगों को लगता है कि डायबिटीज में चावल बिल्कुल नहीं खाना चाहिए, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह पूरी तरह सही नहीं है। डायबिटीज मरीज भी सामान्य लोगों की तरह संतुलित और सीमित मात्रा में भोजन कर सकते हैं। हालांकि, चीनी, ग्लूकोज और अधिक मीठे पदार्थों से परहेज जरूरी है। हरी सब्जियों का ज्यादा सेवन फायदेमंद होता है। आलू को सीमित मात्रा में खाया जा सकता है। कम मिठास वाले फल जैसे खीरा, नाशपाती, मौसंबी, संतरा और अनार भी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। दालें, सोयाबीन, चना और राजमा भी अच्छे विकल्प हैं।

पैदल चलना क्यों है जरूरी

हर डायबिटीज मरीज के लिए नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है। दिन में कम से कम आधा घंटा पैदल चलने से ब्लड शुगर कम होती है, शरीर की चर्बी घटती है और वजन नियंत्रित रहता है। साथ ही, इससे अग्नाशय की इंसुलिन बनाने की क्षमता भी बेहतर होती है। चाय और कॉफी दिन में दो-तीन बार बिना चीनी के पी जा सकती है।

इंसुलिन को लेकर फैली अफवाहें

इंसुलिन को लेकर कई गलत धारणाएं हैं। कुछ लोग मानते हैं कि इंसुलिन सिर्फ इंजेक्शन से ही ली जा सकती है और एक बार शुरू करने के बाद इसे जीवनभर लेना पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी मरीज को इंसुलिन की जरूरत है, तो उससे बचना नहीं चाहिए। सही समय पर इंसुलिन लेना जान बचा सकता है।

गर्भावस्था और डायबिटीज

गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज होने पर विशेष सावधानी जरूरी होती है, क्योंकि मां के शुगर लेवल का सीधा असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। शुगर अनियंत्रित रहने पर बच्चे का आकार बड़ा हो सकता है या जन्मजात समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गर्भावस्था में डायबिटीज का इलाज आमतौर पर इंसुलिन से किया जाता है।

इन्हें भी पढ़ें: Health & Wellness: सुबह जल्दी उठने के 10 फायदे जानिए अभी!

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top