Migraine Diet: माइग्रेन का दर्द उन लोगों से पूछिए जो रोज़ाना इसे झेलते हैं। यह सिर्फ एक सामान्य सिरदर्द नहीं होता, बल्कि ऐसा दर्द होता है जो इंसान की पूरी दिनचर्या बिगाड़ देता है। माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति अक्सर लगातार सिर दर्द, भारीपन और बेचैनी महसूस करता है। कई बार दर्द इतना तेज हो जाता है कि मतली, उल्टी और रोशनी या आवाज से चिढ़ जैसी समस्याएं भी शुरू हो जाती हैं। आज के समय में माइग्रेन के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह समस्या बच्चों से लेकर बड़ों तक को प्रभावित कर रही है।
माइग्रेन को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है, क्योंकि लंबे समय तक इसका असर दिमाग पर भी पड़ता है। इससे सोचने-समझने की क्षमता कमजोर हो सकती है, याददाश्त पर असर पड़ता है और मानसिक थकान भी बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते माइग्रेन के दर्द को कंट्रोल किया जाए। अगर आप दवाइयों पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहते, तो आयुर्वेद में बताए गए कुछ आसान घरेलू उपाय आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
माइग्रेन से बचाव के लिए आयुर्वेदिक टिप्स
आयुर्वेद के अनुसार माइग्रेन शरीर में वात और पित्त के असंतुलन के कारण होता है। जब यह असंतुलन बढ़ जाता है, तो सिरदर्द, जलन, एसिडिटी और मतली जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं। अच्छी बात यह है कि कुछ सरल आयुर्वेदिक उपायों को अपनाकर इस दर्द में राहत पाई जा सकती है। भीगी हुई किशमिश, जीरा-इलायची की चाय और गाय का घी माइग्रेन के दर्द को शांत करने में मदद कर सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि ये सभी चीजें आसानी से आपकी रसोई में मिल जाती हैं।
1. भीगी हुई किशमिश
माइग्रेन के मरीजों के लिए भीगी हुई किशमिश किसी औषधि से कम नहीं है। आप सुबह दिन की शुरुआत हल्की हर्बल चाय से कर सकते हैं और रात में सोने से पहले 10 से 15 भीगी हुई किशमिश का सेवन करें। यह उपाय माइग्रेन के सिरदर्द को कम करने में काफी असरदार माना जाता है।
अगर आप इसका लगातार करीब 12 हफ्तों तक सेवन करते हैं, तो यह शरीर में बढ़े हुए वात को शांत करता है और अतिरिक्त पित्त को भी कम करता है। इसके साथ ही माइग्रेन से जुड़े लक्षण जैसे एसिडिटी, मतली, जलन, एक तरफ सिर में दर्द और गर्मी के प्रति असहिष्णुता में भी राहत मिलती है।
2. जीरा-इलायची की चाय
जीरा-इलायची की चाय माइग्रेन के दौरान होने वाली मतली, तनाव और बेचैनी को कम करने में मदद करती है। इसे आप लंच या डिनर के लगभग एक घंटे बाद पी सकते हैं या फिर जब भी माइग्रेन के लक्षण ज्यादा महसूस हों, तब इसका सेवन कर सकते हैं।
इस चाय को बनाना बेहद आसान है। आधा गिलास पानी लें, उसमें एक छोटी चम्मच जीरा और एक इलायची डालें। इसे करीब 3 मिनट तक उबालें, फिर छानकर हल्की गर्म चाय की तरह पिएं। यह ड्रिंक न सिर्फ माइग्रेन के दर्द को शांत करती है, बल्कि मन को भी आराम देती है। इसे सोने से पहले या दर्द के समय कभी भी लिया जा सकता है।
3. गाय का घी
आयुर्वेद में गाय के घी को पित्त को संतुलित करने का सबसे अच्छा उपाय माना गया है। माइग्रेन में जब दिमाग और शरीर में पित्त बढ़ जाता है, तो घी उसे शांत करने में मदद करता है। गाय के घी का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है।
आप खाने में रोटी, चावल या सब्जी में थोड़ा सा घी मिला सकते हैं। रात को सोते समय दूध के साथ घी पीना भी फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा नाक में गाय के घी की 2 बूंद डालना भी आयुर्वेदिक उपायों में शामिल है। माइग्रेन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ जड़ी-बूटियां जैसे ब्राह्मी, शंखपुष्पी और यष्टिमधु को भी घी के साथ लिया जा सकता है।
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