Brain Malaria: बच्चों के माता-पिता के लिए जरूरी जानकारी

Brain Malaria: मच्छर के काटने से मलेरिया होता है, यह बात लगभग हर कोई जानता है। लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि मलेरिया का एक रूप इतना खतरनाक भी हो सकता है, जो सीधे दिमाग पर हमला कर दे। इसी गंभीर बीमारी को ब्रेन मलेरिया कहा जाता है। हाल के दिनों में, खासकर लगातार हो रही बारिश के बाद, ब्रेन मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ते नजर आ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इसका असर बच्चों में ज्यादा देखा जा रहा है। ऐसे में इस बीमारी के बारे में सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।

बच्चों में क्यों बढ़ रही है ब्रेन मलेरिया की शिकायत?

बरसात के मौसम में जगह-जगह पानी भर जाता है, गंदगी और दूषित पानी जमा हो जाता है, जिससे मच्छरों को पनपने का पूरा मौका मिलता है। इसी कारण इन दिनों ब्रेन मलेरिया के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. डॉक्टरों के अनुसार, ब्रेन मलेरिया बच्चों में ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता। ब्रेन मलेरिया को कई जगहों पर दिमागी बुखार भी कहा जा रहा है। यह बीमारी मच्छर के जरिए शरीर में प्रवेश करने वाले प्लाज्मोडियम नामक पैरासाइट के कारण होती है, जो खून के जरिए दिमाग तक पहुंच सकता है।

नॉर्मल मलेरिया से कितना अलग है ब्रेन मलेरिया?

आमतौर पर मलेरिया मादा एनाफिलीज (Anopheles) मच्छर के काटने से फैलता है। शुरुआत में यह सामान्य मलेरिया जैसा ही लगता है, लेकिन जब इसका असर ज्यादा बढ़ने लगता है, तो यह गंभीर रूप ले लेता है। कई मामलों में यह वाइवेक्स या अन्य खतरनाक रूप में बदल जाता है, जिससे लीवर और शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचता है। अगर इस दौरान समय पर इलाज और सही दवाएं नहीं मिलती, तो संक्रमण दिमाग तक पहुंच जाता है। इसके बाद मरीज को तेज बुखार, ठंड लगना, बदन दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

ब्रेन मलेरिया के मुख्य कारण

डॉक्टरों के मुताबिक, बारिश के बाद फैली गंदगी और दूषित पानी ब्रेन मलेरिया का सबसे बड़ा कारण है। यही वजह है कि शहरों से लेकर गांवों तक यह बीमारी तेजी से फैल रही है। इस गंभीर संक्रमण वाले मलेरिया को कई जगहों पर ब्रेन मलेरिया या एमटी मलेरिया भी कहा जाता है। अगर समय रहते इलाज न मिले, तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।

ब्रेन मलेरिया के लक्षण, जिन्हें बिल्कुल न करें नजरअंदाज

ब्रेन मलेरिया के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, लेकिन कई बार ये काफी तेजी से भी बढ़ सकते हैं। इसके आम लक्षण हैं- शरीर का कांपना और तेज बुखार आना. बुखार का बार-बार लौटकर आना. तेज बुखार के साथ ठंड लगना. शरीर में ऐंठन या झटके आना. दिन में बुखार उतर जाना और रात में ठंड के साथ फिर बुखार आना. अगर किसी बच्चे या बड़े में ऐसे लक्षण दिखें, तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें।

ब्रेन मलेरिया से बचाव कैसे करें?

ब्रेन मलेरिया से बचाव के लिए सावधानी ही सबसे बड़ा उपाय है। इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें- खुले में सोने से बचें और हमेशा मच्छरदानी लगाकर ही सोएं. घर के आसपास पानी जमा न होने दें और गंदगी साफ रखें. साफ और सुरक्षित पानी ही पिएं. जहां मच्छरों का प्रकोप ज्यादा हो, वहां रहने से बचें. बच्चों को ऐसी जगहों पर जाने न दें जहां मच्छर ज्यादा हों. अगर किसी को बुखार हो, तो देर न करें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

निष्कर्ष

ब्रेन मलेरिया एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और सही इलाज से इससे बचा जा सकता है। खासकर बच्चों के मामले में जरा-सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए सावधानी बरतें, मच्छरों से बचाव करें और किसी भी तरह के बुखार को नजरअंदाज न करें।

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