How to Delete Digital Footprint: आज की डिजिटल दुनिया में हम जो भी करते हैं, उसका एक रिकॉर्ड बनता रहता है। आपने क्या सर्च किया, कौन-सा वीडियो देखा, किस जगह गए, किस ऐप का इस्तेमाल किया-सब कुछ कहीं न कहीं सेव होता रहता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लेकर Google तक, हमारी ऑनलाइन गतिविधियां हमारी डिजिटल पहचान का हिस्सा बन जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप चाहें तो इस डिजिटल फुटप्रिंट को काफी हद तक मिटा सकते हैं? हाल ही में वायरल हुई एक पोस्ट में बताया गया कि कुछ आसान स्टेप्स अपनाकर आप अपनी ऑनलाइन प्राइवेसी पर दोबारा कंट्रोल पा सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे।
गूगल एक्टिविटी से शुरुआत करें
हमारी ऑनलाइन गतिविधियों का सबसे बड़ा हिस्सा Google के पास होता है। चाहे आपने कुछ सर्च किया हो, YouTube पर वीडियो देखा हो या Google Maps का इस्तेमाल किया हो-यह सारी जानकारी Google Activity में सेव रहती है। इसे हटाने के लिए आपको myactivity.google.com पर जाना होगा। वहां “Delete activity by” का ऑप्शन मिलेगा। यहां से आप चाहें तो “All time” चुनकर अब तक का पूरा डेटा मिटा सकते हैं या किसी खास तारीख की एक्टिविटी डिलीट कर सकते हैं। यह स्टेप आपकी पुरानी डिजिटल हिस्ट्री साफ करने का पहला और जरूरी कदम है।
डेटा कलेक्शन को रोकना भी जरूरी
सिर्फ पुराना डेटा हटाना काफी नहीं है। अगर आगे भी वही जानकारी सेव होती रही तो समस्या बनी रहेगी। इसलिए जरूरी है कि आप डेटा कलेक्शन को ही बंद कर दें। इसके लिए Google अकाउंट के “Activity Controls” सेक्शन में जाएं। यहां आपको तीन अहम ऑप्शन मिलेंगे: Web & App Activity, Location History, YouTube History। इन सभी को ऑफ कर देने से Google आपके सर्च, लोकेशन और वीडियो देखने की आदतों को रिकॉर्ड करना बंद कर देगा। इससे आपकी नई डिजिटल फुटप्रिंट बनने की रफ्तार काफी कम हो जाएगी।
डिवाइस ट्रैकिंग भी करें बंद
आजकल हम एक ही Google अकाउंट कई डिवाइस पर इस्तेमाल करते हैं-मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट आदि। ऐसे में अलग-अलग डिवाइस की गतिविधियां भी ऑटोमैटिकली लॉग होती रहती हैं। इसे रोकने के लिए Google अकाउंट की “Data & Privacy” सेटिंग्स में जाकर ट्रैकिंग से जुड़े सभी ऑप्शन बंद कर दें। इससे आपकी अलग-अलग डिवाइस की एक्टिविटीज रिकॉर्ड नहीं होंगी।
ऑटो-डिलीट फीचर का इस्तेमाल करें
हर बार मैन्युअली डेटा डिलीट करना थोड़ा झंझट भरा लग सकता है। इसके लिए Google का “Auto-Delete” फीचर काफी काम का है। इस फीचर को ऑन करके आप चुन सकते हैं कि 3 महीने, 18 महीने या 36 महीने से पुराना डेटा अपने आप डिलीट हो जाए। यानी आपको बार-बार लॉगिन करके हिस्ट्री साफ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आपका अकाउंट तय समय के बाद खुद-ब-खुद क्लीन होता रहेगा।
इंटरनेट इस्तेमाल करते समय रहें सतर्क
सिर्फ डेटा मिटाना ही काफी नहीं है। इंटरनेट पर सुरक्षित रहना भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए आप VPN का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे आपकी ऑनलाइन पहचान छुपी रहती है। साथ ही, Brave, Tor या DuckDuckGo जैसे प्राइवेसी-फोकस्ड ब्राउजर का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। ये ब्राउजर आपकी एक्टिविटी को कम से कम ट्रैक करते हैं। इसके अलावा, अपने पासवर्ड हर कुछ महीनों में बदलते रहें। इससे किसी भी संभावित डेटा ब्रीच से बचने में मदद मिलती है।
अपनी ऑनलाइन पहचान पर रखें पूरा कंट्रोल
डिजिटल फुटप्रिंट मिटाना सिर्फ ब्राउज़र हिस्ट्री डिलीट करने का मामला नहीं है। यह आपकी ऑनलाइन पहचान को नियंत्रित करने का तरीका है। जब आप तय करते हैं कि कौन-सी जानकारी इंटरनेट पर रहेगी और कौन-सी हटेगी, तब आप सच में अपनी प्राइवेसी पर कंट्रोल पाते हैं। इन आसान स्टेप्स को अपनाकर आप अपनी डिजिटल मौजूदगी को सीमित कर सकते हैं और इंटरनेट पर ज्यादा सुरक्षित रह सकते हैं।
इन्हें भी पढ़ें: Vivo V70 और V70 Elite की कीमत, वेरिएंट और प्री-ऑर्डर डेट लीक

